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रिंग रोड 3 स्थित शराब दुकान में ओवररेटिंग का ‘खेल’, अधिकारी 24 घंटे बाद भी मौन; अवैध वसूली को मिल रहा बढ़ावा?

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रायपुर। राजधानी रायपुर के रिंग रोड नम्बर 3 पर स्थित शासकीय अंग्रेजी शराब दुकान पिरदा एक बार फिर अवैध वसूली और ओवर रेट पर शराब बेचने को लेकर सुर्खियों में है। उपभोक्ताओं से लगातार निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे वसूलने की शिकायतें आम होने के बावजूद, क्षेत्रीय आबकारी अधिकारी द्वारा कोई कार्रवाई न करना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

शिकायत के तुरंत बाद भी अधिकारी प्रकाश देशमुख की 24 घंटे की चुप्पी को सीधे तौर पर इस गोरखधंधे को बढ़ावा देना समझा जा रहा है।

संवाददाता की पड़ताल में हुआ खुलासा

कल (शनिवार) को हमारे संवाददाता ने स्वयं ग्राहक बनकर पिरदा स्थित शासकीय अंग्रेजी शराब दुकान की पड़ताल की। संवाददाता ने यहां से ‘मैकडोनल्ड नम्बर वन’ नामक शराब की खरीदारी की। बिल के अनुसार, इस बोतल का निर्धारित मूल्य 190 रुपये था, लेकिन काउंटर पर बैठे कर्मचारियों ने खुलेआम 200 रुपये की मांग की और वसूले। यानी, ग्राहक से प्रति बोतल पर 10 रुपये अधिक की अवैध वसूली की गई।

यह घटना यह साबित करती है कि दुकान में ओवररेटिंग का धंधा बेखौफ चल रहा है, जिससे सरकारी खजाने को चूना लग रहा है और उपभोक्ताओं को लूटा जा रहा है।

आबकारी अधिकारी को तुरंत दी गई थी सूचना

ओवररेटिंग की इस घटना के तुरंत बाद, हमारे संवाददाता ने क्षेत्रीय आबकारी अधिकारी प्रकाश देशमुख से मोबाइल पर संपर्क किया और उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी। आबकारी विभाग का यह दायित्व होता है कि इस तरह की गंभीर शिकायत मिलने पर वे तत्काल दुकान पर जांच दल भेजें और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।

हालांकि, शिकायत दर्ज कराए हुए 24 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन आबकारी अधिकारी प्रकाश देशमुख की ओर से इस संबंध में न तो कोई जांच शुरू की गई है और न ही कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही की गई है।

अधिकारी का मौन रवैया बना सवालिया निशान

आबकारी अधिकारी का यह मौन रवैया विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जानकारों का मानना है कि सरकारी दुकानों पर ओवररेटिंग एक बड़ा अपराध है, और शिकायत मिलने के बाद भी अधिकारी का कोई कदम न उठाना, सीधे तौर पर अवैध वसूली करने वालों को संरक्षण देना माना जा सकता है।

स्थानीय उपभोक्ताओं ने मांग की है कि उच्च आबकारी अधिकारियों को तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और अधिकारी प्रकाश देशमुख के इस ढीले रवैये की भी जांच करनी चाहिए, क्योंकि उनकी निष्क्रियता इस अवैध वसूली को निरंतर बढ़ावा दे रही है।

 

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