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बुलडोजर की कार्रवाई पर सवाल: तोड़ी गई दुकान की जगह खड़ी हो गईं 5 नई दुकानें, निगम 11 दिन से मौन

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अवैध निर्माण पर दोहरी नीति! जोन 6 में प्रशासन को जानकारी के बावजूद 11 दिन से कार्रवाई क्यों रुकी?

रायपुर।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों अवैध जमीन और दुकान कब्जाधारियों पर नगर निगम द्वारा लगातार की जा रही कार्रवाई के चलते राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है। एक तरफ जहां निगम सख्ती बरतने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जोन क्रमांक 6 से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रशासन की कथित ढिलाई ने उसकी पूरी मुहिम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

जोन 6 में एक ऐसी अवैध दुकान, जिसे मात्र चार महीने पहले नगर निगम ने अवैध घोषित करते हुए बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया था, अब उसी स्थान पर पांच विशाल नई दुकानें बनकर तैयार खड़ी हैं। इससे भी अधिक हैरानी की बात यह है कि निगम को इसकी जानकारी दिए जाने के बावजूद 11 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

तोड़ी गई दुकान की जगह खड़ी हो गईं 5 नई दुकानें

मिली जानकारी के अनुसार, जोन क्रमांक 6 क्षेत्र में एक व्यावसायिक परिसर को लगभग चार महीने पहले नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी मुहिम के तहत ध्वस्त कर दिया गया था। निगम ने तब सख्त संदेश देने का दावा किया था कि अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, निगम के अधिकारियों की आंखों के नीचे ही उस ध्वस्त भूखंड पर रातों-रात बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू हो गया।

वर्तमान स्थिति यह है कि जिस जगह एक पुरानी अवैध दुकान थी, अब वहां पांच बड़ी और पक्की दुकानें बनकर तैयार हो चुकी हैं। ये दुकानें पूरी तरह से तैयार हैं, जिनमें से कुछ को किराए पर दे दिया गया है और शेष बिकने के लिए तैयार हैं।

जोन कमिश्नर ने अनभिज्ञता जताई, फिर 11 दिन बाद भी मौन

जब इस गंभीर अवैध निर्माण और निगम की लापरवाही के संबंध में स्थानीय मीडियाकर्मियों ने जोन क्रमांक 6 के जोन कमिश्नर से संपर्क किया, तो उन्होंने इस निर्माण की जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया। अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें नए निर्माण की कोई सूचना नहीं मिली है।

हालांकि, जब उन्हें अवैध निर्माण से संबंधित वीडियो साक्ष्य उपलब्ध कराए गए, तो जोन कमिश्नर ने तत्काल कार्रवाई करने की बात कही और यकीन दिलाया कि जल्द ही बुलडोजर चलाया जाएगा।

परंतु, इस आश्वासन को दिए आज 11 दिन बीत चुके हैं और मौके पर नगर निगम की टीम या कोई बुलडोजर कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। निर्माणकर्ता को पर्याप्त समय मिल चुका है और दुकानें अब पूरी तरह से बाजार में उतरने को तैयार हैं।

निगम की ढिलाई पर बड़ा सवाल

राजधानी में एक ओर निगम राजनीतिक दबाव के बावजूद अवैध कब्जों पर लगातार ‘बुलडोजर’ चलाने का दावा कर रहा है, वहीं यह विशिष्ट मामला प्रशासन की दोहरी नीति को उजागर करता है।

बड़ा सवाल यह उठता है कि जब नगर निगम के शीर्ष अधिकारी को वीडियो साक्ष्य के साथ अवैध निर्माण की जानकारी दी जा चुकी है, तो आखिर ऐसी कौन सी “मजबूरी” या “शिथिलता” है जो उन्हें 11 दिनों तक कार्रवाई करने से रोक रही है?

अधिकारियों की यह चुप्पी सीधे तौर पर अवैध निर्माणकर्ताओं के साथ मिलीभगत या बड़े राजनीतिक दबाव की ओर इशारा करती है। यदि तत्काल कार्रवाई नहीं होती है, तो यह माना जाएगा कि निगम ने अवैध रूप से निर्मित इन पांच दुकानों को मौन स्वीकृति दे दी है, जिससे भविष्य में अन्य अवैध कब्जाधारियों का मनोबल भी बढ़ेगा। इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग जोर पकड़ रही है।

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