मुंगेली में चर्चाओं का बाजार गर्म, जिले के अन्य मंत्रियों और विधायकों की लोकप्रियता पर प्रश्न!
मुंगेली। मुंगेली जिले में इन दिनों एक बड़े आयोजन के समय को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव के जन्मदिन के दिन ही मुंगेली व्यापार मेले के रंगारंग शुभारंभ ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं – क्या ये महज एक संयोग है, या इसके पीछे TRP, क्रेडिट, ट्रेडिंग या कोई बड़ी राजनीतिक प्लानिंग छिपी है?
मुंगेलीवासियों के अनुसार, ‘स्टार्स ऑफ टुमॉरो वेलफेयर सोसायटी मुंगेली’ द्वारा प्रतिवर्ष दिसंबर माह में मुंगेली व्यापार मेला का आयोजन किया जाता रहा है। एकाध बार यह नवंबर में भी हुआ है, और चुनावी वर्ष में जनवरी में भी इसका आयोजन देखा गया है। हालांकि, इस बार दसवें वर्ष का यह भव्य आयोजन 25 नवंबर को वीर शहीद धनंजय सिंह स्टेडियम में सायं 05:30 बजे से शुरू हुआ। ख़ास बात यह है कि इसी दिन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव का जन्मदिन भी है।
जिले के राजनीतिक लोगों का मानना है कि सामान्यतः यह व्यापार मेला दिसंबर माह में होता, लेकिन “कई व्यक्तिगत लाभों” को देखते हुए इस बार इसे उपमुख्यमंत्री अरुण साव के जन्मदिन यानी 25 नवंबर को शुरू करने का निर्णय लिया गया। उनका तर्क है कि व्यापार मेले का आयोजन नवंबर में किसी और तारीख को भी हो सकता था, पर उपमुख्यमंत्री के जन्मदिन के ही दिन इसकी शुरुआत कई कारणों को प्रदर्शित कर रही है।
चर्चा है कि क्या यह जिले में बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक परिणाम है या सिर्फ एक इत्तेफाक? क्या यह उपमुख्यमंत्री की लोकप्रियता को भुनाने, “TRP” हासिल करने, राजनीतिक “क्रेडिट” लेने, किसी बड़ी “राजनीतिक प्लानिंग” का हिस्सा है, या इसमें कोई “ट्रेडिंग” का खेल है?
राजनीति से जुड़े लोग यह भी कह रहे हैं कि यह पहला मौका है जब व्यापार मेला किसी बड़े राजनीतिक चेहरे के जन्मदिन पर शुरू हो रहा है। उनका कहना है कि अक्टूबर से जनवरी तक मुंगेली का नेतृत्व करने वाले कई अन्य राजनीतिक व्यक्तियों (मंत्री या विधायक) का जन्मदिन भी आता है, लेकिन उनके जन्मदिन के अवसर पर कभी इस तरह व्यापार मेले का आयोजन नहीं किया गया। यह स्थिति कहीं न कहीं जिले के अन्य मंत्रियों और विधायकों की लोकप्रियता पर भी प्रश्नचिह्न लगा रही है।
बहरहाल, इन तमाम राजनीतिक अटकलों और चर्चाओं के बावजूद, मुंगेली की आम जनता में व्यापार मेले को लेकर काफी उत्साह है। लोग रंगारंग कार्यक्रमों और विभिन्न स्टॉलों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अब देखना यह है कि यह “संयोग” मुंगेली की राजनीति में क्या रंग लाता है।



