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आबकारी विभाग सवालों के घेरे में: शराब दुकानों में नियमों को ताक पर रखकर सुपरवाइजरों की नियुक्ति

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रायपुर। छत्तीसगढ़ का आबकारी विभाग, जो राज्य की आय का एक बड़ा हिस्सा संभालता है, अब गंभीर सवालों के घेरे में है। विभाग द्वारा स्वयं बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर शराब दुकानों में सुपरवाइजरों की नियुक्तियां की जा रही हैं, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, आबकारी विभाग ने खुद यह नियम तय किया था कि शराब दुकान में सुपरवाइजर के पद पर केवल स्नातक डिग्रीधारी व्यक्ति ही कार्य कर सकेंगे, जबकि 12वीं पास उम्मीदवार केवल सेल्समैन के पद तक ही योग्य माने जाएंगे। यह नियम विभाग में योग्यता और दक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया था।

रायपुर में नियमों की धज्जियां

लेकिन रायपुर की जमीनी हकीकत इन नियमों से कोसों दूर दिखती है। विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रायपुर के कई शराब दुकानों में अयोग्य व्यक्तियों को वरीयता देकर सुपरवाइजर के महत्वपूर्ण पद पर बिठाया गया है।
कमल विहार शराब दुकान: 12वीं पास सुपरवाइजर सूत्रों के अनुसार, कमल विहार स्थित शराब दुकान में पुरुषोत्तम नामक व्यक्ति सुपरवाइजर की कुर्सी संभाले हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि उनकी शैक्षणिक योग्यता केवल 12वीं पास है। यह तथ्य हैरान करता है कि वे अधिकारियों की ‘मेहरबानी’ से डिग्रीधारियों को पछाड़कर इस महत्वपूर्ण पद पर बने हुए हैं।
कटोरा तालाब शराब दुकान: बगैर डिग्री के चंदू सुपरवाइजर इसी तरह का एक और मामला कटोरा तालाब स्थित शराब दुकान से सामने आया है, जहां चंदू नामक व्यक्ति सुपरवाइजर का पद संभाल रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, उनके पास भी स्नातक की कोई डिग्री नहीं है, फिर भी उन्हें नियमों के विरुद्ध जाकर इस पद पर नियुक्त किया गया है।
सवाल खड़े करती व्यवस्थाएं ये उदाहरण स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि रायपुर की शराब दुकानों में नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां की गई हैं। सूत्रों का दावा है कि कई जगह तो 8वीं और 10वीं पास लोग भी सुपरवाइजर की कुर्सी पर बैठे हैं, जो विभाग के अपने मानकों का सीधा उल्लंघन है।
ऐसे में यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि जब आबकारी विभाग ने स्वयं योग्यता के मानदंड तय किए हैं, तो उन्हें लागू करने में इतना परहेज क्यों किया जा रहा है? क्या यह किसी बड़े भ्रष्टाचार या पसंदीदा लोगों को लाभ पहुंचाने का मामला है? शिक्षित बेरोजगार युवाओं के हक को दरकिनार कर अयोग्य व्यक्तियों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाना, विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
सूत्रों ने यह भी बताया कि यह सूची यहीं खत्म नहीं होती। रायपुर की कई और शराब दुकानों में भी इसी तरह के नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं, जिनकी परतें जल्द ही खोली जाएंगी। इस पूरे मामले पर आबकारी विभाग के उच्च अधिकारियों की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है और जवाबदेही की मांग कर रही है।

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