भारतीय सेना ने कहा है कि उसने मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में “आतंकवादियों के नौ ठिकानों पर निशाना लगाकर हमला किया है”
पहलगाम में हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार तनाव बढ़ा हुआ है. 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी। उनके बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ी कार्रवाई करने की बात कही थी।
सेना ने अपने इस ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन सिंदूर नाम’ दिया और इसके बारे में जानकारी देने के लिए सेना की दो महिला अधिकारी बुधवार सुबह पत्रकारों के सामने आईं। आइए जानते हैं कौन हैं वो अधिकारी..
कर्नल सोफ़िया क़ुरैशी

कर्नल सोफ़िया क़ुरैशी भारतीय सेना की एक अधिकारी हैं। साल 2016 में बहुराष्ट्रीय फील्ड प्रशिक्षण अभ्यास भारत के पुणे शहर में हुआ था. एफटीएक्स के ‘फोर्स 18’, में आसियान प्लस देश शामिल थे. यह भारतीय धरती पर आयोजित अब तक का सबसे बड़ा ग्राउंड फोर्सेज अभ्यास था। इसमें 40 सैनिकों की भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व सिग्नल कोर की महिला अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल सोफ़िया क़ुरैशी ने किया था। उस वक़्त उन्हें इतने बड़े बहुराष्ट्रीय अभ्यास में भारतीय सेना के प्रशिक्षण दल का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनने का दुर्लभ गौरव हासिल हुआ। रक्षा मंत्रालय ने भी अपने एक एक्स पोस्ट में इसकी जानकारी दी थी और सोफ़िया क़ुरैशी की तस्वीरें भी शेयर की थीं। क़ुरैशी गुजरात से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने बायोकेमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएट किया है. कुरैशी एक सैन्य परिवार से आती हैं. उनके दादाजी भारतीय सेना में थे. उनकी शादी मैकेनाइज़्ड इन्फ़ेंट्री के एक अधिकारी से हुई है। उन्होंने छह साल तक संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में भी काम किया है. इसमें साल 2006 में कॉन्गो में एक उल्लेखनीय कार्यकाल शामिल है। उस वक़्त उनकी प्रमुख भूमिका शांति अभियान में ट्रेनिंग संबंधित योगदान देने की थी।
व्योमिका सिंह

विंग कमांडर व्योमिका सिंह दूसरी अधिकारी थीं, जिन्होंने सेना के ऑपरेशन सिंदूर के बारे में मीडिया को जानकारी दी। व्योमिका सिंह इंडियन एयर फ़ोर्स में हेलीकॉप्टर पायलट हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वो हमेशा एक पायलट ही बनना चाहती थीं। उनके नाम का मतलब ही ‘आसमान से जोड़ने वाला’ होता है और इस नाम ने उनकी महत्वाकांक्षा को आकार दिया। व्योमिका सिंह नेशनल कैडेट कोर यानी एनसीसी में थीं और उन्होंने इंजीनियरिंग की है. उन्हें साल 2019 में भारतीय वायुसेना के फ्लाइंग ब्रांच में पायलट के तौर पर परमानेंट कमीशन मिला था।व्योमिका सिंह ने 2500 घंटों से ज़्यादा उड़ान भरी है. उन्होंने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर भारत में मुश्किल हालात में चेतक और चीता जैसे हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। उन्होंने कई बचाव अभियान में भी अहम भूमिका निभाई है. इनमें से एक ऑपरेशन अरुणाचल प्रदेश में नवंबर 2020 हुआ था।



