नई दिल्ली। देशभर में आज से शारदीय नवरात्र का पावन पर्व शुरू हो गया है। अगले नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना, भक्ति, शक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय और नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है।
धार्मिक महत्व और अनुष्ठान: नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पहले दिन घटस्थापना के साथ ही भक्त नौ दिनों के कठिन उपवास और साधना की शुरुआत करते हैं। मंदिरों और घरों में विशेष हवन, यज्ञ और माता की चौकी का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और सुख-समृद्धि के लिए मां भगवती का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
गरबा और डांडिया की धूम: जहां एक ओर मंदिरों और घरों में वैदिक मंत्रों और आरतियों की गूंज सुनाई देगी, वहीं शाम ढलते ही पंडालों और मैदानों में गरबा और डांडिया का उत्साह चरम पर होगा। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे युवा और बुजुर्ग एक साथ मिलकर मां के भजनों पर थिरकते नजर आएंगे। गुजरात से शुरू हुई यह परंपरा अब पूरे देश में सांस्कृतिक सौहार्द का बड़ा माध्यम बन चुकी है, जहां हर वर्ग और समुदाय के लोग एक साथ मिलकर इस उत्सव का आनंद लेते हैं।
बाजारों में रौनक और विशेष व्यंजन: नवरात्र से पहले ही बाजारों में खूब रौनक देखने को मिल रही है। व्रत में खाने वाले फलाहारी व्यंजन, पूजा सामग्री, माता की चुनरी, रंग-बिरंगे परिधानों और सजावट के सामान की बिक्री में इजाफा हुआ है। घरों में साफ-सफाई और विशेष पकवान बनाने की तैयारी चल रही है। सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक और फल-मेवे जैसे खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ गई है। रेस्टोरेंट और कैटरर्स भी व्रत स्पेशल थालियां और पकवान पेश कर रहे हैं।
कन्या पूजन और विजयादशमी: नवरात्र के आठवें और नौवें दिन, यानी अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इसमें नौ छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है, उन्हें भोजन कराया जाता है और उपहार दिए जाते हैं। यह पर्व विजयादशमी (दशहरा) के साथ समाप्त होता है, जो भगवान राम द्वारा रावण के वध और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के संहार की याद दिलाता है।
कुल मिलाकर, नवरात्र का यह महापर्व न केवल आध्यात्मिक शांति और शक्ति का संचार करता है, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का भी प्रतीक है। यह हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है।



