Home विदेश अमेरिका से छोटा देश, फिर भी क्यों नहीं झुकता ईरान? जानिए कितनी...

अमेरिका से छोटा देश, फिर भी क्यों नहीं झुकता ईरान? जानिए कितनी ताकतवर है उसकी मिलिट्री

2
0

वाशिंगटन
अमेरिका के मुकाबले ईरान सैन्य ताकत, आबादी और क्षेत्रफल समेत सभी पैमानों पर कमजोर दिखता है। इसके बाद भी बीते एक सप्ताह से वह अमेरिका और इजरायल के खिलाफ संयुक्त जंग में लड़ रहा है। यही नहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल ने रेड लाइन पार कर दी है और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना होगा। ऐसी स्थिति में यह सवाल उठता है कि आखिर 9 करोड़ की आबादी वाले ईरान के पास इतनी ताकत कहां से आती है। इस सवाल का जवाब ईरान की सेना है। ईरान की आबादी भले ही 9 करोड़ है, लेकिन उसके सैनिकों की संख्या बड़े-बड़े देशों से कहीं अधिक है।

ईरान की सेना की बात करें तो वह मुख्य रूप से दो हिस्सों में विभाजित है। पहली है नियमित सेना, जिसे Artesh कहा जाता है। दूसरी है IRGC यानी इस्लामिक रिवॉलूशनरी गार्ड कॉर्प्स। इसे स्पेशल फोर्सेज भी कहा जाता है। ईरान की रेग्युलर आर्मी में थल सेना, नेवी और एयर फोर्स आते हैं। इसके अलावा ईरान एयर डिफेंस फोर्स भी है। अब संख्या की बात करें तो ईरान की थल सेना में 3 लाख 50 हजार सैनिक हैं। नेवी में 18 हजार हैं और वायुसेना में 37 हजार सैनिक शामिल हैं। इसी तरह एयर डिफेंस फोर्स में 15000 सैनिक शामिल हैं।

अब बात करते हैं ईरान की रिवॉलूशनरी गार्ड कॉर्प्स की। इसमें 1 लाख 50 हजार जमीनी सैनिक हैं। नेवी में 20 हजार जवान हैं और एयरोस्पेस 15,000 हैं। इसी तरह कुद्स फोर्स में 5 हजार सैनिक हैं। इसके बाद नंबर आता है रिजर्व फोर्स का, जिसमें 4 लाख 50 हजार सैनिक शामिल हैं। इस तरह सब मिलाकर ईरान की सैन्य संख्या 10 लाख 60 हजार हो जाती है। यह एक बड़ा आंकड़ा है। 25 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान की सैन्य संख्या भी 6 लाख 50 हजार ही है। सबसे बड़ी फौज चीन की मानी जाती है, जिसमें करीब 20 लाख सैनिक हैं।

इसके बाद दूसरे नंबर और तीसरे नंबर पर अमेरिका और भारत हैं। दोनों मुल्कों की संख्या 13 लाख से अधिक है। ईरान की ताकत की यह भी एक वजह है कि वह अमेरिका और इजरायल से मुकाबले में पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है। यही नहीं एक्सपर्ट मान रहे हैं कि अब ईरान तो खुद ही चाहता है कि यह जंग थोड़ी लंबी खिंचे। ऐसा होने पर अमेरिका को ही निकलने का बहाना खोजना पड़ेगा। ईरान की लीडरशिप नहीं चाहती कि वह किसी भी हाल में अमेरिका या इजरायल से समझौता करती दिखे। बता दें कि लंबे युद्धों में अकसर अमेरिका को ही परेशानी का सामना करना पड़ा है। अमेरिका को वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान से बीच में ही निकलना पड़ा था।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here