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मुंगेली में भगवान परशुराम की प्रतिमा 6 माह से ढकी: राजनीति की भेंट चढ़ा अनावरण, विक्षिप्त महिला कर रही सेवा

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मुंगेली। शहर में भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी की नवस्थापित प्रतिमा पिछले करीब छह महीनों से कपड़े और पॉलीथिन में लिपटी खड़ी है। ब्राह्मण समाज द्वारा अक्षय तृतीया, जो कि भगवान परशुराम का जन्मोत्सव होता है, के अवसर पर प्रतिमा का अनावरण कर पूजा अर्चना करने की तैयारी की गई थी, लेकिन स्थानीय राजनीतिक खींचतान और महत्वाकांक्षाओं के चलते यह धार्मिक आयोजन फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है।

पुराना बस स्टैंड, सिटी कोतवाली के सामने स्थापित इस प्रतिमा का अनावरण नहीं होने से मुंगेलीवासियों, विशेषकर ब्राह्मण समाज में भारी रोष है। आरोप है कि कुछ राजनीतिक महत्वाकांक्षी और पद-लोलुप किस्म के लोग अपने ‘राजनीतिक मालिकों’ (उच्च पदस्थ नेताओं) से अनावरण करवाने की फिराक में हैं, ताकि उनकी राजनीतिक रोटियां सिक सकें, जिसके कारण भगवान परशुराम की प्रतिमा भी राजनीति की भेंट चढ़ गई है।

अनावरण के इंतजार में बीती अक्षय तृतीया

भगवान परशुराम को उग्र, शक्तिशाली और धरती से बुराई का नाश करने वाला माना जाता है। अक्षय तृतीया के दिन उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है, और समाज के लोगों की अपेक्षा थी कि इस शुभ अवसर पर कम से कम प्रतिमा को अनावरण कर दिया जाए, ताकि पूजा-अर्चना शुरू हो सके। हालांकि, राजनीतिक बाधाओं के चलते ऐसा नहीं हो सका।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रतिमा स्थापित हुए कई महीने हो चुके हैं, और इस चौक का नामकरण भी ‘भगवान परशुराम चौक’ के रूप में किया गया है, फिर भी नगर पालिका या संबंधित ठेकेदारों द्वारा अनावरण को लेकर लगातार बहाने बनाए जा रहे हैं।

विक्षिप्त महिला कर रही है प्रतिमा की सेवा, जिम्मेदार उदासीन

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और मार्मिक पहलू यह है कि जहां एक ओर जिम्मेदार लोग प्रतिमा का अनावरण करने से बच रहे हैं, वहीं एक मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला (जो सिटी कोतवाली के आसपास रहती है) रोज सुबह-शाम कपड़े में लिपटी प्रतिमा के आसपास झाड़ू-पोछा लगाकर साफ-सफाई करती है।

मुंगेलीवासियों द्वारा यह सवाल उठाया जा रहा है कि यदि एक मानसिक विक्षिप्त महिला प्रतिमा के प्रति ऐसी निष्ठा दिखा सकती है, तो मानसिक रूप से स्वस्थ माने जाने वाले जिम्मेदार ठेकेदारों और नगर पालिका अधिकारियों को प्रतिमा को कई महीनों से कपड़े में लपेटकर रखने का क्या औचित्य है? क्या भगवान परशुराम की प्रतिमा के अनावरण के लिए किसी मंत्री या विधायक का इंतजार किया जा रहा है?

नगर पालिका का अजीबोगरीब तर्क, आक्रोशित हुआ समाज

प्रतिमा का अनावरण न होने पर नगर पालिका से जुड़े लोगों ने तर्क दिया है कि शहर के विभिन्न चौराहों पर कई महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित की जानी हैं, और इन सभी प्रतिमाओं का अनावरण एक साथ किया जाएगा।

हालांकि, मुंगेली के निवासी और ब्राह्मण समाज इस ‘एक साथ अनावरण’ के तर्क से सहमत नहीं हैं। वे उदाहरण देते हुए बताते हैं कि सिंधी समाज द्वारा सिंधी कॉलोनी चौक में शहीद हेमू कालाणी जी की मूर्ति की स्थापना की गई थी, जिसका अनावरण लगभग 2 वर्ष पूर्व हो चुका है। यदि हेमू कालाणी जी की प्रतिमा का अनावरण व्यक्तिगत रूप से किया जा सकता है, तो भगवान परशुराम जी की प्रतिमा को अनावरण के लिए महीनों तक क्यों रोका गया है?

बहरहाल, मुंगेली में अब राजनीतिक खींचतान और लोक आस्था के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भगवान परशुराम जी की प्रतिमा पर से ‘राजनीति की चादर’ कब हटेगी और उनका विधिवत अनावरण कब हो पाएगा।

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