तिल्दा-नेवरा, नगर में अवैध सट्टे का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है, जिससे स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रेलवे ओवरब्रिज के नीचे और कैंप क्षेत्र सहित नगर के कई इलाकों में बिना किसी भय के यह धंधा धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाते नहीं दिख रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस अवैध खेल के पीछे नगर के बड़े और प्रभावशाली लोगों का हाथ है, जिनकी पहुंच इतनी मजबूत है कि पुलिस-प्रशासन उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने से कतराता है। लोगों का आरोप है कि पुलिस अक्सर छोटे-मोटे सट्टेबाजों को पकड़कर कार्रवाई का दिखावा करती है, जबकि असली ‘सट्टा किंग’ हमेशा कानून की गिरफ्त से बाहर रहते हैं। यह स्थिति नागरिकों में आक्रोश और निराशा पैदा कर रही है।
नगर में यह चर्चा भी आम है कि कहीं इस अवैध कारोबार से प्रशासन के कुछ अधिकारियों को भी ‘हिस्सा’ तो नहीं मिल रहा है। यही वजह है कि यह धंधा दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है और इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि प्रशासन की मिलीभगत नहीं होती, तो यह अवैध कारोबार इतनी बेखौफ तरीके से जारी नहीं रह पाता।
अब सवाल यह है कि आखिर वह दिन कब आएगा जब तिल्दा-नेवरा के असली सट्टा किंग पुलिस की गिरफ्त में होंगे, या फिर प्रशासन इसी तरह बेबस होकर इस अवैध धंधे को फलते-फूलते देखता रहेगा? स्थानीय लोग प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तुरंत ध्यान देने और ठोस कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं ताकि नगर को इस अवैध कारोबार के चंगुल से मुक्त कराया जा सके।



