रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा सर्वसम्मति से पारित ‘हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं’ (No Helmet, No Petrol) के नियम ने एक अप्रत्याशित संकट को जन्म दे दिया है। यह पहल जहां एक तरफ वाहन चालकों में हेलमेट पहनने की आदत को विकसित करने और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए लागू की गई थी, वहीं अब कुछ तथाकथित पत्रकार इसे ‘आपदा में अवसर’ में बदलकर पेट्रोल पंप संचालकों से अवैध उगाही में जुट गए हैं।
पेट्रोल पम्प संचालकों के अनुसार, उन्होंने ग्राहकों की सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए यह कड़ा निर्णय लिया था। इस पहल का विभिन्न सामाजिक संगठनों और प्रशासन ने भी स्वागत किया था, लेकिन अब ऐसा सामने आ रहा है कि कुछ छुटभैये पत्रकार, जो खुद को विभिन्न ऑनलाइन पोर्टलों या स्थानीय समाचार माध्यमों से जुड़ा बताते हैं, उन पेट्रोल पंपों को निशाना बना रहे हैं जो किसी कारणवश बिना हेलमेट वाले ग्राहकों को पेट्रोल दे देते हैं।
कैसे हो रही है अवैध उगाही?
पीड़ित पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि ये तथाकथित पत्रकार बिना हेलमेट वाले ग्राहकों को पेट्रोल देते हुए पंप कर्मचारियों का वीडियो बनाते हैं। इसके बाद वे पंप मालिक या मैनेजर से संपर्क कर “खबर चलाने” या “कानूनी कार्रवाई की धमकी” देकर पैसों की मांग करते हैं। अगर पैसे नहीं दिए जाते हैं तो वे वीडियो को अपने पोर्टल्स पर या सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देते हैं, जिससे पेट्रोल पम्प की छवि खराब होती है।
एक पेट्रोल पम्प संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम इस नियम का पूरी तरह समर्थन करते हैं, लेकिन कई बार ग्राहकों से सीधे टकराव मोल लेना मुश्किल हो जाता है, खासकर भीड़भाड़ वाले समय में या जब ग्राहक आक्रामक हो जाते हैं। ऐसे में मजबूर होकर पेट्रोल देने पर हमें इन ‘पत्रकारों’ की अवैध वसूली का शिकार होना पड़ता है। ये लोग 500 से 2000 रुपये तक की मांग करते हैं और न देने पर हमारे खिलाफ गलत खबरें फैलाने की धमकी देते हैं।”
पेट्रोल पंप एसोसिएशन की अपील
पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने इस मसले पर चिंता व्यक्त की है और प्रशासन से इसमें हस्तक्षेप करने की अपील की है। एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक अच्छे उद्देश्य को कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए बदनाम कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि जो पेट्रोल पंप नियमों का पालन करें, उन्हें सुरक्षा मिले और जो लोग पत्रकारिता की आड़ में अवैध उगाही कर रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई हो।”
इस मामले ने न केवल पेट्रोल पंप संचालकों को परेशानी में डाला है, बल्कि पत्रकारिता जैसे सम्मानित पेशे की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है। प्रशासन को इस पर संज्ञान लेते हुए ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि ‘हेलमेट नहीं तो पेट्रोल नहीं’ जैसी जनहितैषी पहल अपने मूल उद्देश्य से भटकने न पाए और पेट्रोल पंप संचालक भयमुक्त होकर काम कर सकें।



